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Hymn No. 1019 | Date: 27-Apr-1999
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क्यों पूछता है तू ऐसे अबूझ प्रश्न, जिसका जवाब दे नहीं सकता ।
क्यों पूछता है तू ऐसे अबूझ प्रश्न, जिसका जवाब दे नहीं सकता ।
है भूत-भविष्य को जाननेवाला, तू है नियन्ता वर्तमान का ।
क्या है दिल में मेरे, तेरी नजरो से कैसे छुप सकता है ।
मन की हर इक बात को जाने, फिर पूछे तू चाहता है क्या ।
आती जाती है कई क्षुद्र इच्छाये, चिरकाल की इच्छा को तू है पहचानता ।
पूरा करने को नहीं कहता, तेरी मर्जी के अनुरुप रहना हूँ चाहता ।
दूर था तो कोई बात नहीं, करीब लाके तरसाना बुरी बात है ।
मन को इक बार रोक लूं, दिल को कहने से रोक नहीं सकता हूँ ।
ऐ.. मूक साक्षी तोड़ दे अपने मौन को, सुनके दर्द भरी पुकार मेरी ।
प्यार के सिवाय कुछ चाहता नहीं न चाहूंगा, हारता रहूँ चाहे प्राणो की बाजी ।


- डॉ.संतोष सिंह