VIEW HYMN

Hymn No. 1018 | Date: 27-Apr-1999
Text Size
किस-किस चीज के लिये करुँ अदा मैं शुक्रिया तेरा, इतना दिया है तू सब कुछ
किस-किस चीज के लिये करुँ अदा मैं शुक्रिया तेरा, इतना दिया है तू सब कुछ
सलामत रखा तूने पैदा होने से अब तक, हर पल करुँ अदा शुक्रिया तो भी न होगा पूरा ।
माता-पिता, बंधु-सखा ऐसा कौन सा रिश्ता न दिया, रचा तूने संसार को मेरे लिये ।
रहने को ठिकाना, खाना-पीना मनमाना दिया, भर आती है आंखे देखके कृपा तेरी ।
अहसास होने न दिया हमको, हर पल देता रहा कुछ न कुछ तूने ।
सबसे बड़ी बात तब हुयी, जब बरसाया तूने अपूर्व कृपा देके अपना साथ ।
दया करना मुझ कमजोर पे, तेरे प्रियों के जैसा समर्थ नहीं मैं ।
हक न है मेरा कहीं इस ज्ञात जगत में, मेरे तन-मन का स्वामी है तू ।
बीते जीवन करते हुये चाकरी तेरी, तुझसे अलग कभी हो न पाऊं ।
हर ले हमारे हर अहम को, जो बाधा डाले मेरे मन में तेरे प्रति ।


- डॉ.संतोष सिंह