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Hymn No. 1022 | Date: 29-Apr-1999
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जो हुआ न था होने लगा, जीवन का हर पन्ना तेरा साथ मिलते ही बदलने लगा ।
जो हुआ न था होने लगा, जीवन का हर पन्ना तेरा साथ मिलते ही बदलने लगा ।
ढूंढता नहीं अब किसीको, तेरे पास आने के लिये जरूरत न रही बहाने की ।
सोचा-समझा हुआ काम न आया, दिल को प्यार हुआ जो तुझसे बन्द दरवाजे खुलते चले गये ।
तूने कभी कुछ न कहा, जो चाहा आंखो में आंख डालके कहता चला गया ।
अजीब है तेरे तौर-तरीके, दुनिया से उलट करता तू सब कुछ, शायद यही सही है ।
सिखाया गूढ़ जीवन को, तूने गीतो के माध्यम से ढालके सुगम सरल संगीत में।
बताया कई बार विभिन्न प्रथाओं के बारे में, जो जारी है सदियों से करने और अर्थ के भेद को ।
निश्चित तेरे बारे में कुछ कह न पाऊंगा, जितना सरल सादा है तू उतनी गुढ़ तेरी बाते ।


- डॉ.संतोष सिंह