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Hymn No. 1023 | Date: 29-Apr-1999
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राही हैं हम न जाने कितने पड़ाव से गुजरके पहुँचे पास तेरे ।
राही हैं हम न जाने कितने पड़ाव से गुजरके पहुँचे पास तेरे ।
दिल में थी सदियों से एक ही हसरत, कुछ भी करके हो जाये मुलाकात ।
कसम से जो ख्वाबों में था वो साकार हो गया, जो दीदार हो गया तेरा ।
अनजाने थे हम अपनी मंजिल से, तेरी कृपा से पहूंचे आज हूँ यहां पे ।
राह को ठीक से जाना न था, तेरा नाम कर गया काम पता का ।
भटके तो कई बार अनजान डगरो पे, पर सहारा था विश्वास का ।
हर अनहोनी पे विजय पाता चला गया, तेरे प्यार के सहारे ।
पड़ाव आते गये रुकना न किया कबूल, पिछली भूलों की छाप थी हमपे ।
सब कुछ कराया दिल ने, जिसे तेरे सिवाय कुछ न मंजूर था ।
सत्य ये है जो तूने चाहा, तो निःशंक होके कर गुजरना था हमें ।


- डॉ.संतोष सिंह