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Hymn No. 1024 | Date: 29-Apr-1999
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सिखा दे बातों को पहुँचाना प्रिय के पास तक दिल ही दिल में कहके ।
सिखा दे बातों को पहुँचाना प्रिय के पास तक दिल ही दिल में कहके ।
प्यार तो है बहुत पर बात करने न आया नजरो ही नजरों में ।
इस राज़ पर से पर्दाफाश कर दे, कैसे होता है दीदार सर झुका के ।
देख सुनके सीखते हैं सब, हम तो सीखना चाहते हैं इशारों को तेरे ।
ऐतबार है मुझे तुझपे, तेरा प्यार देखके बेसब्रा कर ले तू मेरी भावनाओं को ।
कोई हिचक न है अब दिल में, कबूल कर ले तू मेरी भावनाओं को ।
तत्पर हो उठता है मेरा मन, जब होनी होती है तुझसे मुलाकात ।
बहुत रह लिया दूर-दूर तुझसे, अब रहना चाहता हूँ सदा साथ तेरे ।
क्या अब भी रह गयी है कोई कमी, हमारे प्यार में, दुर करना होगा तुझे है पूरा विश्वास ।
प्रभु कुछ भी कर तू दे हमें ताकत इतनी, स्वीकार करना पड़े तुझे प्रार्थना हमारी ।


- डॉ.संतोष सिंह