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Hymn No. 1025 | Date: 30-Apr-1999
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सदगुरु के सामने कोई नहीं होता, हर रिश्ते बाद में पहले वो सबसे ।
सदगुरु के सामने कोई नहीं होता, हर रिश्ते बाद में पहले वो सबसे ।
पधारे संग उसके ब्रह्मा विष्णु महेश, आशीष लेना तू पहले सबसे उसकी ।
जो उसने दिया वो कोई न है दे सकता, जो न मिला उससे तो न मिलेगा जगन्नाथ से ।
परमपिता आता है जब धरा पे, तो धरता है रूप सदगुरु का ।
तारणहार कह ले या पालनहार सीमित न हुआ शब्दों में वो तो असीम है ।
एक बार धरा हाथ जिसके सर पे, बाधा डाल न पायी दुनिया की कोई शक्ति ।
उसके सानिध्य का मोल चुका नहीं सकते, चाहे कुर्बान कर दूँ खुद को लाखों बार ।
ज्वलंत उदाहरण है प्रेम और शक्ति का, फिर भी झेलता है हम सबके दुखों को
बांटा है सदा कुछ न कुछ हम सबको, चाहा है कभी कुछ तो बस हमारे प्यार को।
गुरु तुझे आँकने न निकला हूँ, हम तो इजहार कर रहे अपने दिलकी बातों का
करबद्ध हूँ तेरे सामने, इस क्षुद्र को मनमानी करने न देना, तेरा मुताबिक हमें ढलना ।
कमजोर हूँ मन का पर दिल में तेरे प्रति प्यार है, सदा सर पे तेरा हाथ रहे ।


- डॉ.संतोष सिंह