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Hymn No. 1026 | Date: 30-Apr-1999
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महबूब मेरे प्यार को तू कम न आँकना, अभी तो कली हूँ जब खिलूंगा तब देखना ।
महबूब मेरे प्यार को तू कम न आँकना, अभी तो कली हूँ जब खिलूंगा तब देखना ।
कयामत न ढायी हमने तुझपे तो कहना क्या, चर्चा होगी हमारे प्यार के जलवे की चारो ओर ।
लोग शब्दो के तीर चलाते हैं, हम चलायेंगे भावों के, पहली नजर में तू शिकार होगा हमारे प्यार का ।
दोष तू क्यों देगा, हमने नजरों से वार करना सीखा तुझसे, दर्द क्या होता है जानेगें आज उसे ।
कहना आसान होता है प्यार करके कायम रहना मुश्किल, दिल की बाते हैं न कोई फरियाद ।
प्यार करके तरसाना कोई तुझसे सीखें, लेगे हर एक का हिसाब आज, तुझे अपने पास से न जाने देगे ।
महफिल होगी ऐसी चारों ओर, छाये रहेंगे प्यार के जलवे, मजबूर होगा दिल के हाथों जाना होगा तुझे जा नहीं पायेगा ।
वार पे वार करेंगे, उठने न देगें तेरे मन में कोई और खयाल, भूलेगा तू खुदको हम ही हम रहेंगे चारों ओर तेरे ।
सारी शिकायतें दूर कर दूंगा, तुझे अपने प्यार के नशे में चूर कर दूंगा, बिसर जायेगा तू सब कुछ या खुदको बिसार दूंगा तुझमें ।
चाल पे चाल चलूंगा प्यार की, प्यार ही मेरी ढाल बनेगी, प्यार से तेरा शिकार बनूँगा या शिकार करूंगा ।


- डॉ.संतोष सिंह