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Hymn No. 1027 | Date: 01-May-1999
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एक बार नजर जो मिली तुझसे हटती नहीं ।
एक बार नजर जो मिली तुझसे हटती नहीं ।
ऐसा कौन सा जादू है मजबूर कर देता है तेरे पास रहने को ।
तेरे गीतो में ऐसा कौन सा नशा, जो उतरता नहीं दिल पे से।
चंचल मन रुकता न था किसीके पास, तेरे पास आके ठहर गया ।
तेरी महफिल के लायक न थे, प्यार होते ही शुमार करने लगे ।
इंतजार करना सीखा न था, तुझसे मिलते ही जान गये किसको कहते है इंतजार ।
फेल होने का डर लगता था, तेरे पास रहके पास होते रहे लगता है अब ।
कैसे बताऊं क्या पा गया, तेरे पास आते ही सब कुछ हाथ आ गया ।
ख्वाबों को देखा करते थे, साकार करना सीख गये तेरी इनायत से ।
सब कुछ मिट रहा है, मिटके धीरे-धीरे तुझमें सिमट रहा हूँ ।


- डॉ.संतोष सिंह