VIEW HYMN

Hymn No. 1065 | Date: 14-Apr-1999
Text Size
देना है तो दे दे, तेरा अनमोल सानिध्य ।
देना है तो दे दे, तेरा अनमोल सानिध्य ।
लेना है तो ले ले मेरा मैं, पूर्णतःहो जाऊं तेरा ।
ढहा दूंगा तन-मन की दीवारों को, जो आयेगी तेरे-मेरे बीच ।
अचूक कृपा है हमपे तेरी, होगें हम कामयाब ।
जिजिविशा घुली हुयी थी अब तक हमारे जीवन में ।
जो भी करुँगा निर्भिकता से, जो बन गया मैं तेरा ।
कुचल के रख दूंगा जो रोडे डालेगा तेरे-मेरे बीच में ।
होनी-अनहोनी होती रहेगी, हम तुझमें डूबे रहेंगे ।
नियति खेलेगी खेल अपना, पर तेरी मर्जी से ।
पूर्णतः तेरा अधिकार है हमपे, जो तेरे मन में आये वो तू करे ।


- डॉ.संतोष सिंह