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Hymn No. 1084 | Date: 19-May-1999
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निकल पडा मैं बनके तेरा दिवाना, छायी हुयी है मस्ती तेरी।
निकल पडा मैं बनके तेरा दिवाना, छायी हुयी है मस्ती तेरी।
कोई क्या सतायेंगा मुझे, मेरे होश उड़ गये प्यार में तेरे ।
किस बात की शिकायत करुँ किससे, जब प्यार ही प्यार हो चारो ओर मेरे ।
समझ मेरा जाती रही बन चुका हूँ, प्यार में तेरे बावरा।
लौट आना मेरे वश में नहीं, दिल तो डूब चुका है प्यार में तेरे ।
कोई ख्वाहिश नहीं रखता बचने की, रहा-सहा भी मिट जाऊं प्यार में तेरे ।
किस बात की है देरी, प्यार से उसे कर देंगे पूरी ।
कुछ जरूरी न रहा जीवन में, अब प्यार के सिवाय ।
लुटाने को कुछ न बचा, हम जो लुट चुके प्यार में तेरे ।
शर्म मेरी जाती रही, जब से हुआ है प्यार तुझसे ।


- डॉ.संतोष सिंह