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Hymn No. 1126 | Date: 04-Jun-1999
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हें.. काका दिखाता तो तू है सीधा-सादा, पर है बड़ा छुपा रूस्तम ।
हें.. काका दिखाता तो तू है सीधा-सादा, पर है बड़ा छुपा रूस्तम ।
जब देखो तब भरमाता है हम मतवालों को, पता कहीं और का ठिकाना, कहीं और रहता है ।
मत खेला कर तू खेल इतना हमसे, कर्मो के पहले से मारे हुए है, माया में कही और पहूँच जाएँगे ।
डरता न हूँ आने-जाने से, हाँ चाहता हूँ हरपल तुझे पास अपने, कबूल है हमें तेरी हर मर्जी ।
जन्मती है मन में कई इच्छाएँ, उनमें से एक इच्छा बार-बार है जन्मती तेरा प्यार पाने के लिए ।
दोष हमने कभी ना दिया तुझे, दोष तो था हममें, फिर भी संगत के लिए हूँ बेकरार ।
शरारतें कई बार की है जीवन में, अब शरारत तेरे संग करने को जी चाहता है
डर न रहा अब किसी से, डरती हूँ अपने मन से, जब जुडता है तेरी माया से ।
प्यार किया हैँ तुझसे, भरोसा है मुझे निकलूँगा इस काया से, बनकर तेरा शाश्वत प्यार ।


- डॉ.संतोष सिंह