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Hymn No. 1125 | Date: 04-Jun-1999
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माँ तू करती है हमेशा कितना प्यार, जो स्वीकार कर लेती है, हमारे हाथों का हार ।
माँ तू करती है हमेशा कितना प्यार, जो स्वीकार कर लेती है, हमारे हाथों का हार ।
जब-जब रोया, पाया अपनेआप को करीब तेरे, प्यार से तुमने दुलारा-पुचकारा है हमे सदा ।
दिया तुमने क्या ना हमें, फिर भी मन न भर पाया कभी, देखाना है कि क्या नहीं भाग्य में हमारे ।
सारे सहारों ने जब साथ छोड़ा, तो माँ हमको तेरी याद आई, भागे-भागे पहुँचे पास तेरे ।
किया मनमानी सदा, पर तुमने दूर होने ना दिया, अपने प्रेम से धीरे-धीरे बदला हमको ।
माँ विश्वास करना तू हमपर न जाने देंगे तेरे प्यार को व्यर्थ, जीवन जिऊँगा तेरे प्यार के सहारे ।
कितनी भी होगी कमी हो जाएँगे मुक्त सभी से, माँ मैने शरण लिया है तेरे चरणो में ।
माँ तुझे देने कुछ न है पास मेरे, पर जो तू चाहे ले लेना जीवन से मेरे, हक है तेरा हमपर।


- डॉ.संतोष सिंह