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Hymn No. 1171 | Date: 20-Jun-1999
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यह तो मस्ती है तेरे प्यार की, जो बयाँ करती है हाल दिल का ।
यह तो मस्ती है तेरे प्यार की, जो बयाँ करती है हाल दिल का ।
बड़ी मुश्किल से गुजरती है, जब सताए याद तेरी, दिल को ।
सँवरने की चाह ना रही मन में, बिखर जाना चाहता हूँ तेरा प्यार बनकर ।
बेसुध हो जाना चाहता हूँ, तेरे ख्यालों में, कि हम हुए थे कभी इस धरा पर ।
तेरे गीतों में जो आनंद है, विभोर कर देता है तन-मन को ।
धरा के इस पत्थर को मिल गई जगह गई त्रिलोक स्वामी के चरणो में ।
ना रही कोई दरखास्त, जब से शामील होने लगे तेरे महफिल में ।
तेरे साथ में जो दम है, हवा बनते देखा दूनिया के सारे गमों को ।
खाक में मिली हुए राख का महत्त्व जाना तेरे पास आकर ।
कहीं और जाने का अब सवाल ना रहा, मिलते ही हमने जान लिया ।


- डॉ.संतोष सिंह