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Hymn No. 1173 | Date: 22-Jun-1999
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मजा आ रहा है जीवन में, जीते-जी जो तुझसे मुलाकात हो गई ।
मजा आ रहा है जीवन में, जीते-जी जो तुझसे मुलाकात हो गई ।
ख्वाबों में जो देखा था, वह सच हो गया, मुलाकात होते ही तुझसे ।
जिसको मन का भ्रम समझता था, वह य़थार्थ निकला, तेरी बात समझते ही ।
मिट गया है जीवन और मौत का फासला, जो तेरे प्यार में डूबने लगा दिल ।
एहसास नहीं होता किसी बात का मन पर, जो खोया रहता है खयालों में तेरे ।
पहले कुछ और था मिलते में समय, अब मिलना हो किसीसे हम खोए होते है आनंद में ।
जरूरी कुछ ना रहा जीवन में, जीवन जो रंग गया प्रभु प्यार में तेरे ।
खेल तेरा समझ गया, ज्यो-ज्यों अस्पष्ट सी छवि उभरने लगी दिल में ।
नजर ढूँढे अब तुझे कहीं भी, जब दिल में उभरती है प्यार की हलचल ।
मचल रहा हूँ बच्चो की तरह, तेरे पास सदा रहने के लिए ।


- डॉ.संतोष सिंह