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Hymn No. 1197 | Date: 03-Jul-1999
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याद-कर-करके तुझे, बह जाऊँ मैं आँसू बनकर ।
याद-कर-करके तुझे, बह जाऊँ मैं आँसू बनकर ।
प्रेम भरे गीतों को गाते-गाते, ढल जाऊँ प्रेम संगीत में ।
भेद सारे मिट जाए, तेरे प्रेम में प्रेम बनकर रह जाऊँ ।
अलग होने का कोई चिन्ह ना रहे, चाहे होना पड़े निष्प्राण मुझे ।
बताने को कुछ ना रहे, तेरी हर बात मेरी हो जाए ।
जग में रहूँ कही भी, दूर ना हो पाऊँ तुझसे कभी ।
तेरी मस्ती में खोया रहूँ, चाहे कुछ भी हो जग-तन में ।
पतन हो या उत्थान, नाममात्र आभास ना हो दिल को ।
बावरा कहे या कुछ और मुझे, हम तो रहे प्यार बनकर तेरा ।
मौत मिले या जिंदगी, आभास ना हो तेरे सिवाय कुछ और का ।


- डॉ.संतोष सिंह