VIEW HYMN

Hymn No. 1199 | Date: 04-Jul-1999
Text Size
खो जाए तुझमें तेरा बनकर, प्रभु मेरा मैं मिट जाए तेरे में ।
खो जाए तुझमें तेरा बनकर, प्रभु मेरा मैं मिट जाए तेरे में ।
बहुत अलग रहकर जी लिया, अब तुझे घुल मिल जाना चाहता हूँ ।
आहत ना होना तू मेरी बातों से, अब जीतना चाहता हूँ तुझको ।
भ्रम ने भ्रमण कराया संसार में, अब दिल रमना चाहे तेरे प्यार में ।
विशेष भी अलग करे तुझसे, समरूपता चाहता हूँ दिल में तेरा होने के लिए ।
सफर की शुरूआत कि थी तेरे द्वार से, अंत चाहता हूँ तेरे द्वार पर ।
हर खेल खेला हमने कई बार, अब खेल लेने दे प्यार का खेल ।
मन को रास आया बहुत कुछ, पर तेरे जितना कोई रास न आया ।
बहुत दूर रह लिया तुझसे, अब प्यार मेरा बढ़ाकर करीब बुला ले मुझे ।
मेरे वश में ना है, तो चाहे तो कर सकता हूँ मैं सब कुछ ।


- डॉ.संतोष सिंह