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Hymn No. 1200 | Date: 05-Jul-1999
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तुमने जलाया रूठे हुए दिल में प्रेम का दीप ।
तुमने जलाया रूठे हुए दिल में प्रेम का दीप ।
कंठ तक डूबा हुआ था जीवन गमों के अंधकार में ।
जीवन जीते हुए कभी न जाना, वस्तुतः क्या हैं जीवन ।
प्रेम के बदौलत नवसृजन का निर्मण हुआ हमारे भीतर ।
जो जाना न था, उसकी पहचान कराई तुमने हमें ।
अपनी नजरों से तुमने भर दी खुशियाँ जीवन में हमारे ।
इस बेसहारे को मिल गया प्रभु प्यार भरा तेरा सहारा ।
कहाँ न भटका जो मिला तेरे दर पर ठिकाना ।
आस ना थी हमें इतने का, पूरी हो गई तेरी कृपा से ।
दामन जो पकड़ा तेरा, प्रभु कहीं और न जाने देना हमें ।


- डॉ.संतोष सिंह