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Hymn No. 1216 | Date: 17-Jul-1999
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इंतजारी है हमें अपने प्यार की, दिल में लगी है जो आग प्यार की ।
इंतजारी है हमें अपने प्यार की, दिल में लगी है जो आग प्यार की ।
वक्त गुजरता जा रहा है हर पल, वह पल कब नसीब होगा, जब मिलेंगे तुझसे ।
सुलगती हुए आग को भड़का जाती है, तेरे दामन को छूकर आती हुई हवाएँ ।
सनम इसमें ना दोष है कुछ तेरा, हर प्यार का अंजाम होता है ऐसा ।
तेरी निगाहों के शीतल छीटें भी भड़का जाते है, लगी हुई प्यार की आग को ।
बचने की ना रखता हूँ तमन्ना, जल्दी से जल्दी फनाह हो जाए प्यार की आग में ।
दाग लगता है दामन पर तो लगने दे, बड़े भाग्य से मिलता है प्यार तेरा ।
जो शुरु किया है तुमने प्यार के सिलसिला को, तेरे हाथों से खत्म होना लिखा है ।
मिन्नत में मेरे रह गई हो कमी, तो पूरी करवा ले तू मुझसे प्यार से इसे ।
सहा नहीं जा रहा है प्यार के आग में जलकर बदलता जा रहा हूँ राख में ।


- डॉ.संतोष सिंह