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Hymn No. 1217 | Date: 17-Jul-1999
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रोकने से रोक सकता नहीं कोई, अब मुझे प्यार करने से तुझे ।
रोकने से रोक सकता नहीं कोई, अब मुझे प्यार करने से तुझे ।
आए चाहे चारों ओर से आँधिया, बढ़े हुए कदमों को लौटा सकता नहीं ।
मजबुरीयत ना है प्यार का नाम, ये तो है दिल से उठा हुआ तुफान ।
राह में आएगा अगर कोई हिमालाँ, बहा ले जाएँगे बनकर उसे सैलाब हम ।
कमजोर हूँ कितना भी, जब दिल में होगी ताकत यारे प्यार की ।
आसमाँ को भी पार कर जाएँगे, होकर प्यार की मस्ती में चूर ।
गुमा ना करना तू अपनी ताकत का, सजदा किया है, तुझे अपना प्यार मानकर ।
प्यार में कई बार कटेगा यें सर तेरे चरणो में, कोई झूका सकता नहीं इसे ताकत से ।
कमजोरीया हमारी बदल जाएगी ताकत में, तेरे हाथों से प्यार का जाम पीकर ।
हिम्मत किसी में ना होगी, जो जुदा कर सके मुझको तुझसे ।


- डॉ.संतोष सिंह