VIEW HYMN

Hymn No. 1218 | Date: 17-Jul-1999
Text Size
अगर शहर में हो जाए दंगा, यारों मुझे दोष ना देना ।
अगर शहर में हो जाए दंगा, यारों मुझे दोष ना देना ।
जो प्यार में हमने यारे खुदा के हाथों, प्यार का जाम पी लिया ।
मस्ती देखकर प्यार भरी, जो अबूत भी बूत में ढल गया ।
इससे बड़ा मैं दे नहीं सकता तुझको कोई और सबूत ।
जोर चलता नहीं किसीका प्यार पर, इसके हाथों होता है मजबूर खुदा भी ।
राहें प्यार पर से डिगा सकता नहीं कोई, जो होता है साथ खुदा का ।
अंदाज अपना-अपना है सजदा करने का, बलात कोई बदल सकता नहीं ।
जब उसने नैन लड़ाते समय ना सोचा, काफिर है कौन ।
तो मेरे दिल में क्यों हिचक आए, पीने के लिए मयखाना जाना ना है जरूरी ।
जिंदा जला दो, या गाढ दो, कोई ना फर्क पड़ेगा हमारी जान को ।
खुशी होगी इस बात की, सपना जो अधुरा था वह पुरा हुआ आज ।
कुर्बान किया था जो सब कुछ प्यार में, कुर्बान हो गया मैं प्यार मैं उसपर ।


- डॉ.संतोष सिंह