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Hymn No. 1223 | Date: 21-Jul-1999
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सलाम, सलाम, सलाम तेरे चरणो में मेरा सलाम ।
सलाम, सलाम, सलाम तेरे चरणो में मेरा सलाम ।
दिल का है सलाम, मन से भी तुझको सलाम ।
मेरा रोम-रोम करता है तुझको सलाम पल-पल के लिए ।
कोई फरियाद ना हूँ करता, तुझे याद करने के लिए हूँ करता ।
इस दर्दी का हर वह पल है खुशनुमा बन जाता, जब करता हूँ सलाम ।
तेरे प्यार में हो जाऊँ हलाल, करते हुए तेरे चरणों में सलाम ।
सलामती की खैर ना हूँ चाहता, ये तो प्यार भरा अंदाज है ।
कोई कहे कुछ भी, कोई नहीं मलाल, चौराहों पर भी तुझको सलाम ।
आलम रहे मुझपर सदा करने का तुझको सलाम, मिटना पड़े चाहे हमको ।
प्यार से सलाम बदले गुप्तगूँ में, जो बन जाए तू मेरा बालम ।


- डॉ.संतोष सिंह