VIEW HYMN

Hymn No. 1225 | Date: 22-Jul-1999
Text Size
परम तू इतना साधारण बनकर आया, मैं पहचान न पाया ।
परम तू इतना साधारण बनकर आया, मैं पहचान न पाया ।
आँखों ने धोखा खाया, पर दिल देखते ही तुझको जान गया ।
तेरे गीतों से संचार हुआ आनंद का, जब तन-मन में मेरे ।
तब हमे भान हुआ, तेरे सत्यमय स्वरूप का ।
जब तेरे चरणों में नवाया सिर को, सिर से सरका भार माया का ।
निगाह उठाकर जो देखा निगाहों में, तो कृपा का मतलब जान गया ।
सहलाया जो तुमने सिर को मेरे, मस्त हो उठा रोम-रोम मेरा ।
मत पुछो बयाँ करना नामुमकीन है, सँभल लो पागल हो गया मैं ।
करीब जो वह आ गया मेरे इतना, हर चूर हो गए नशे में ।
जीना हुआ बेकार, जो जीने के लक्षण मिट गए मिलकर उसमें ।


- डॉ.संतोष सिंह