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Hymn No. 123 | Date: 20-Feb-1998
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ऐसा कब होगा प्रभु खो जाये दिलो - दिमाग मेरा तुझमें ;
ऐसा कब होगा प्रभु खो जाये दिलो - दिमाग मेरा तुझमें ;
ऐसा होना पागलपन कहलाता है तो बनने को हूँ तैयार मैं ।
ज्ञानी बनकर क्या करना जब तुझको परखना पड़े मुझको ;
ध्यानी को भी हर क्षण ध्यान लगाना पड़ता है तुझे पाने के लिये ।
मिलने या ना मिलने से परे मैं तो मतवाला बंनूँ तेरे नाम का ;
हर पल भज ना पाऊँगा, कभी मुस्कुराना – रोना चाहूँ तेरे लिये ।
दीदार क्या करना है तेरा, तू तो घट – घट में है समाया ;
जीव – अजीव के फेरे में ना पड़ तू हर इक् में है समाया ।
हिंदु हो या मुसलमान इस जहाँ में तूने ही तो सबको बसाया ;
दुश्मनी और हित, मैं किससे करूँ जब हर इक् दिल में हो तू समाया ।


- डॉ.संतोष सिंह