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Hymn No. 124 | Date: 20-Feb-1998
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प्रभु तूम्हें आना पड़ेगा इस देश में फिर एक बार ;
प्रभु तूम्हें आना पड़ेगा इस देश में फिर एक बार ;
हम जैसे मुर्दों को जगाना पडेगा फिर एक बार ।
दुनिया में रहके फिर से रचना पड़ेगा एक नया रामायण - महाभारत;
हम जैसे मुर्खों को दीखलाना पड़ेगा; फिर एक बार प्रभु तूम्हें आना पडेगा।
मंदिर – मस्जिदों की दीवार को तोड़के हम सबके संग;
जी के दीखलाना पड़ेगा; फिर एक बार प्रभु तूम्हें आना पड़ेगा।
हम सबके संग रहके, नये – नये रास लीला रचाना पड़ेगा ;
हम सबको अपनाना पड़ेगा; फिर एक बार प्रभु तूम्हें आना पड़ेगा ।
हमारे मन के राक्षस को मारके, तन के इच्छाधारी साँपों का दमन कर;
अपने शरण में लेना होगा; फिर एक बार प्रभु तूम्हें आना पड़ेगा।
प्रभु प्रेम का सागर बहाना पड़ेगा – हममें एक दूजे के लिये;
त्याग करना सीखलाना पडेगा, फिर एक बार प्रभु तूम्हें आना पड़ेगा ।
देश और धर्म की सीमाओं को तोड़के हम सबको;
अपना विराट स्वरूप दिखलाना पड़ेगा फिर एक बार प्रभु तूम्हें आना पड़ेगा।
- डॉ.संतोष सिंह
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