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My Divine Blessing
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Hymn No. 125 | Date: 27-Feb-1997
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ऐसी क्या हुई खता, मुझे नहीं है पता,
ऐसी क्या हुई खता, मुझे नहीं है पता,
क्यों है रूठा हुआ मुझसे मेरा खुदा ।
जालिम देना था तो दे देता कोई और सजा;
मुझे नहीं मंजूर तेरे पहलु से होना जुदा ।
मानता हूँ की तूझे चाहने वाले है लाखों में ;
उनके सामने मेरी कोई है औकात नहीं ।
सब तेरे लिये अपना अनमोल धन लुटाते है ;
मेरे पास कुछ भी नहीं, एक दिल है जो तेरा हो चुका ।
तेरे मन में क्या है ये तू ही है जानता ;
मेरे मन की हर इक् बात है तूझे पता ।
जानता है सब कुछ अंजान बनता है तू ;
क्यों दूर रहना चाहता है तू हम सबसे ।
- डॉ.संतोष सिंह
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