Hymn No. 1300 | Date: 22-Sep-1999
जो समय बुलाएगा तू, आना है हमको दौड़कर, राह की हर बाधा तोडकर।
जो समय बुलाएगा तू, आना है हमको दौड़कर, राह की हर बाधा तोडकर। सारे रिश्तो से मुह मोडकर, अपने पराए को छोडकर, कहाँ हुआ तेरा करके दिखाएँगें । जीवन दिया हुआ है तेरा, जो दे दिया तुझको, जीना-मरना सार्थक हो जाएगा मेरा । सार्थक-निरर्थक के झमेलें में ना पडना है मुझको, तेरा बनकर रहना चाहता हूँ जिंदगी में । भटके होंगे राह में लाखों बार, दोष ना है मेरा, तेरा बनकर रहना चाहता हूँ जिंदगी में । भटके होंगे राह में लाखों बार, दोष ना है इसमें किसीका, चल पड़ेगे हर बार हम चाहत जन्मती है अब भी, मिटती रहती है हर बार, पर तेरी चाहत ज्यों की त्यों बनी है । मन में होंगे दोष कई, पर दिल तो चोखा हो चुका है, तेरे प्रेम सानिध्य में डूबकर अधुरी तलाश हो गई है पूरी, जो तेरे करीब पहुँच गए, कम या ज्यादा कुछ ना रहा । बाँधेंगे ना तुझे कसमों में, प्यार किया है, सहेंगे तेरे वास्ते दुनिया के हर सितम को । जन्मो-जन्म से है रिश्ता हमारा, अब एक होने की आयी है बारी, टूटने की बात कहाँ ।
- डॉ.संतोष सिंह
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