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Hymn No. 1388 | Date: 17-Nov-1999
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इक् बात कह लेने दे तू आज मुझे, दिल में प्यार है तेरे वास्ते।
इक् बात कह लेने दे तू आज मुझे, दिल में प्यार है तेरे वास्ते।
जानते है हम जानता है तू, पर जताना सिखा दे तू मुझको आज।
निगाहों से बताना चाहता हूँ तुझको, टपक पड़ती है श्रध्दा बूंद बनके।
कहना चाहता हूँ गीतो की लडियों में पीरोकें, भरभरा के रह जाता है कंठ मेरा।
कह दूँ के अभिव्यक्त करने का है मन करता, डर जाता हूँ न जाने क्यों मैं।
बतीयाना चाहता हूँ हर किसी से तेरी बात, बता न पाऊँ तुझे अपने मन की बात।
ऐसी कौन सी है बात जो बताये भेदं दिलदार से मेरे भीतर के ।
अगर इस जन्म में साध्य ना है प्यार पाना तेरा, तो मिटा दे तू मुझको आज।
साधारण रहके जी लूँगा, पी लूँगा जीवन के सारे जहर, रह नहीं पाऊँगा तेरे बगैर।
विरह में तेरे रहा हूँ तड़प, अपने आप से झड़प कर बैठता हूँ तेरे वास्ते।


- डॉ.संतोष सिंह