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Hymn No. 1425 | Date: 04-Dec-1999
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होशो हवास उड़ गया है मेरा, जोश में आ गया पाके तुझे।
होशो हवास उड़ गया है मेरा, जोश में आ गया पाके तुझे।
बता दे इसमें दोष कहाँ है मेरा, मैं तो हूँ प्यार का सरूर।
मगरूर ना हूँ मैं, बेखबर हो गया हूँ प्यार में तेरे।
मत पूछो मेरा ठिकाना, मैं तो हो चुका हूँ आशिकी का दीवाना।
करना है गर कोई मदद, तो छोड़ दो मुझको मेरे हाल पे।
पूछना तुम मेरा नाम, जो जी में आये पुकार लेना।
दुनिया के हर दस्तूर से परे, मस्त हो चुका हूँ प्यार की मस्ती में।
हस्ती था कभी अब तो मिटता जा रहा हूँ यार के दामन में सिमट के।
ना छुड़ाना तू बइयाँ अपनी, तकलीफ होगी तुझको बहुत।
जिस्म अलग है हमारा पर दिल हो चुका है एक।


- डॉ.संतोष सिंह