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Hymn No. 1424 | Date: 04-Dec-1999
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ऐ हुजूर सुंदर ना है मुखड़ा मेरा ना ही सीरत, इसमे क्या कसूर मेरा।
ऐ हुजूर सुंदर ना है मुखड़ा मेरा ना ही सीरत, इसमे क्या कसूर मेरा।
फिर भी कहूँगा इक् बार नहीं सौ-सौ बार, प्यार करना तू मुझसे जरूर।
माना तेरे करीबी है सर्वश्रेष्ठ इस जहाँ के, इसलिये चुना है तूने उनको।
उल्टा है यहा दामन का हर कोना भरा पड़ा दागों से फिर भी तू करना प्यार जरूर।
मिलता है सभी से कुछ ना कुछ, कुछ ना सही तो निर्मल प्यार।
उल्टा यहाँ देना पड़ेगा प्यार यार इस गये गुजरे को बदलने के वास्ते।
इतना ना है किस्मत वाले जो रोक दे तेरी राह को हक् से।
कर बैठा कोई भूल आके जोश में, ना करना तू शक मेरे प्यार पे।
यार देना ना तू दो कोठी, दास बनाके रख लेना पास तेरे।
बरसाना तू मुझपे रोज कहर, पर रखना नाता कोई ना कोई मुझसे जरूर।


- डॉ.संतोष सिंह