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Hymn No. 1423 | Date: 04-Dec-1999
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बेचैन है मन मेरा, आँखों से नींद दूर है कोसों।
बेचैन है मन मेरा, आँखों से नींद दूर है कोसों।
तड़प रहा हूँ जैसे मीन जल के बिना, लगी है आग प्यार की सीने में।
कसूर क्या है बता दे तू मेरा, जो रखा है दूर मुझको तुझसे।
कौन सी कमी है मेरे प्यार में, यार कर दूँगा दूर तेरे आशीष से।
भूले–भटके हो गयी होगी कोई खता तो कबूल है हर सजा।
मजा नहीं आता तेंरे बिना, अब तो बुला ले तू पास अपने।
तसल्ली ना है मिलती दिलको, गुजारे गये संग तेरे पलों से।
ख्वाब बन गयी है चिंगारी जो भड़काती है प्यार की आग को।
अब गँवारा ना लगे तेरे सिवाय किसी और का साथ।
छुड़ा सकता हें तू याद मुझसे, मिटा सकता नहीं दिल से यादें को तेरी।


- डॉ.संतोष सिंह