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Hymn No. 1427 | Date: 05-Dec-1999
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होगा प्रभु तू सारे जग का, बन जा यार मेरे दिल का।
होगा प्रभु तू सारे जग का, बन जा यार मेरे दिल का।
छोड़ तू तेरी खुदाई, निकलेगे हम तन के फेरे से यार तेरा बनने के वास्ते।
प्यार किया है ना कोई चोरी, क्यों दबाये फिरूँ सीने में।
प्यार में हो चुका हूँ चूर, कोई हँसता है मुझपे तो हँस लेने दो उसे।
कितना भी चाहे तू हो नहीं सकता मुझसे दूर, तू रमता है हर कण-कण में।
आज बदनाम हूँ तो क्या, इक् दिन नाम करुँगा प्यार में तेरा।
हाँ करता हूँ शरारत, शरारत किये बिन, मजा नहीं आता प्यार का।
शायर बनने चला नहीं में, ये शब्द उपजे है तेरी प्रीत से।
तमन्ना ना कोई बची है दिल में, सिवाय तेरे गीतो में खोने के।
गुल जो भी खिलाये कर्म मेरे, हम तो रहना चाहते है मशरुफ प्यार में।


- डॉ.संतोष सिंह