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Hymn No. 1428 | Date: 08-Dec-1999
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कई बार गिरा, हर बार उठा, उठके चला तेरी ओर।
कई बार गिरा, हर बार उठा, उठके चला तेरी ओर।
प्रभु सब कुछ है झूठा, तेरा प्यार सच्चा ये बच्चा समझ न पाया।
लेना चाहा जहाँ से हमने देना चाहा बहुत कुछ तूने जान न पाया।
अंजाने में मारी कुल्हाड़ी पैरों पे अपने, वक्त निकलने पे पछताया बहुत।
बनता काम बिगड़ते पाया, प्यार भरे दिल में व्यंग के बाण चुभते रहे।
फिर भी सीख ना ले सका कोई, हाय बेहया कहाँ से आया।
बातें की तुझसे तेरे होने की, मन बने ना कभी साथ निभाया।
जब जब आया यादों का ख्वाब, तब–तब दिल ने हाय तौबा बहुत मचाया।
माया का केचुल उतार फेंकने की आई बारी, अब ना करुँगा कोई सवारी।
प्रभु तेरे प्यार से प्यारा कोई नहीं, हो जाये अंत जीवन का तेरे पीछे।


- डॉ.संतोष सिंह