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Hymn No. 1429 | Date: 08-Dec-1999
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प्रिय बहन ईरा के जन्मदिन पर।
प्रिय बहन ईरा के जन्मदिन पर।
दीप जला तेरे प्यार से नवजीवन देने के वास्ते बाल – गोपाल को।
प्रेम और ज्ञान की अमूर्त मूरत है वो, मारे किलकारी हर बाल देखके उनको।
आज के दिन आये जग में, तेरी अक्षुण्ण परंपरा को निभाने के लिये।
जगह बना ली मेरे प्यारे काका के दिल में अपने कर्मों से।
हर बच्चे के रोगों को मिटाये, संजीवनी औषध का पान कराके।
सुना था देवता भी रुप बदलके आते है धरा पे आज हमने जान लिया।
देखा न था ममता की ऐसी विशाल मूरत को, तेरी कृपा से दर्शन मिला।
समय के रंग हर कोई करेंगा यशोगान इनका, प्रभु देना आशीष ऐसा।
रोगों का नामानिशान ना होगा जहाँ में, कलयुग में अवतरित हुये धनवंतरी हमारे।
इक् दिन मनायेगा सारा जहाँ जन्मदिन इनका, काका रोग निर्मूलन दिवस कहके।


- डॉ.संतोष सिंह