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Hymn No. 1431 | Date: 09-Dec-1999
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प्रभु कुछ मतलब नहीं मेरे किये हुये का, तेरा होके किया, वो अक्षुण्ण रहा।
प्रभु कुछ मतलब नहीं मेरे किये हुये का, तेरा होके किया, वो अक्षुण्ण रहा।
प्रभु मेरे प्यार का कुछ मतलब नहीं, रहता है वो घिरा स्वार्थों से, तेरा प्यार सबसे निर्मल।
प्रभु आते है पास तेरे किसी संकट में घिरने पे, रहता है तू साथ हमारे
पल–पल यूँ ही।
प्रभु किया ना कुछ ऐसा जो छू जाये तेरे दिल को, करता रहा है हर पल तू हमारे मन की।
प्रभु कोसा है सदा तुझको अपने दुखों के लिये, फिर भी देता रहा है दोनों हाथों से तू।
प्रभु दिल की बात बहुत की, पर सिखा न प्यार करना, तेरे पास आया तो जाना होता है क्या प्यार।
प्रभु अंत न होते पाये अपने मन के विचारों का, धीरे से सिखाया गूर मन पे विजय पाने का।
प्रभु जीता था अपने आपके विरुध्द तन के पीछे, तन-मन से परे रहके मस्त रहना सिखाया तू।
प्रभु तुझे पाने के वास्ते भटकना ना पड़ा गिर-गुफाओं में, तेरी कृपा से तू मिला संसार के मध्य में।
प्रभु संसार चक्की के भार तले दबे थे, एक ही पल में तार–तार कर दे संसार के सपनों का।


- डॉ.संतोष सिंह