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Hymn No. 1470 | Date: 24-Dec-1999
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सा रे ग म प ध नी सा बनाया तूने धूंन सात ।
सा रे ग म प ध नी सा बनाया तूने धूंन सात ।

इंद्रधनुष को सजाया तूने सात रंगो से।

धरा के नीचे – ऊपर बनाया तूने सात लोक।

सत्र ऋषियों से किया शुरुआत मानव गोत्र की तूने।

तन को किया आच्छादित सत्र धातुओं से।

छ चक्रों से होकर पहुचँना पड़ता हें अंतिम धर को।

सात समंदर से सँवारा सारे जग को।

ऐसा क्या था सात में जो भी किया सात तक।

हर भेद की परत होती है क्या सात तक।

प्यारे बता दे तू आज, क्या है राज सात का।

ईश्वर की सृष्टि में महत्त्वपूर्ण - अमहत्त्वपूर्ण कुछ ना है, हर एक सारका अपना अपना महत्त्व है।

शुन्य का भी, क्योंकि इससे ही सब कुछ उपजता है इसमें ही सब कुछ सिमटता है।

कुछ नहीं भी क्यों कि सब कुछ का लोप उसमें होता है, कुछ नहीं रहके भी कुछ नहीं रहते है, बयाँ करना देकर है।


- डॉ.संतोष सिंह