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Hymn No. 1471 | Date: 24-Dec-1999
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कैसे कहूँ यें दिल करता है तुझसे बहुत प्यार।
कैसे कहूँ यें दिल करता है तुझसे बहुत प्यार।
मजबूर जो न कर पाऊँ तेरे दिल को मिलने के वास्ते।
कसम शरम आने लगी, जब दावा करता हूँ दीवाना होने का।
नाम प्यार का लेके, करते है दिखावा करता अपनी मूर्खताओं का।
सुर्खियों में रहना चाहूँ, अपने यार प्यार के नाम पे।
सिखा ना ही अब तक गुमनाम होके करना प्यार।
वादा तो बहुत किया, निभा न पाया एक भी।
जुबां से निकली हर बात पे तेरा नाम दिल डूब न पाया।
तेरी महफिल के लायक न थें, फिर भी शिरकत किया कृपा से।
प्यार की बीन बजायी होता किसी भैंस के आगे, झूम गयी होती अब तक।


- डॉ.संतोष सिंह