VIEW HYMN

Hymn No. 1472 | Date: 24-Dec-1999
Text Size
हमने बदलते देखा सारे जहाँ को प्रभु तेरी कृपा से।
हमने बदलते देखा सारे जहाँ को प्रभु तेरी कृपा से।
बदलना न आया खुद को मिला लाख आशीर्वाद तेरा।
शिरकत किया इस नाचीज ने, जुड़े तुझसे उत्तम लोगों की महफिल में।
जाहिल को बदलते ना देखके, प्रभु तुझको भी शरम आयी।
दोष न था कुछ तेरा, जब दोष को तू चला था बदलने।
लाख समझाया मन को, कुछ देर सही चलके भटकते पाया खुद को।
मुझे मालूम है हारेगा ना तू, पर प्रभु मैं तो हार मान गया।
मेरे वास्ते पड़ा है तुझको सहना, लात मारके कर दे किस्सा तमाम तू।
सबक लेगा हर कोई, ना करेंगा परेशां झूठ – मूठ कोई।
दोजख में तो चाहिये रहना कोई, कर लेंगे संतोष यादों के सहारे तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह