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Hymn No. 1505 | Date: 08-Jan-2000
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ऐं। यार मेरे निकले है मस्ती में, प्यार के दर की ओर।
ऐं। यार मेरे निकले है मस्ती में, प्यार के दर की ओर।
बेखबर है मंजिल से प्यार में होके चूर यार की ओर।
हमपे किसीपे क्या कहर हायेंगे, कि राह में प्यार भरी खबर बन जायेगे।
परवाह ना है नाम की, स्वीकार है हर परिणाम बन आयें चाहे जान पे।
उमड़ा है प्यार का सैलाब, राह में जो आयेगा बन जायेगा प्यार की बूँद।
कसूरवार कोई क्या ठहरायेगा, प्यार का जुनून सदा सर चढके बोलेगा।
तौलने ना निकला हूँ यार को, दिल का अस्तित्व मिटाने चला हूँ प्यार में।
गर कोई लगता है इलजाम कोई फर्क नहीं, हम तो बढ़ते जायेगे ओर इसके।
कसम देके ना रोकना मुझे, कसमे खिलायी जाती है यार पे मिटने के वास्ते।
चूर हो चुका हूँ यार मैं, दुर्गर्ति हो रहीं है तन – मन की तो माफ करना मुझे।
- डॉ.संतोष सिंह
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