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Hymn No. 1504 | Date: 07-Jan-2000
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है ऐ कितने दिनो के बाद मिला है तू, ऐसी क्या हुयी थी खता जो हो गया था तू दूर
है ऐ कितने दिनो के बाद मिला है तू, ऐसी क्या हुयी थी खता जो हो गया था तू दूर
जरूर उलफत में पड़के किया होगा कोई गफलत, जो होना पड़ा मजबूरन दूर तुझको हमसे।
आज आ पहुँचे है पास तेरे, फिर भी आनंद नहीं ले पा रहा हूँ तेरे सामीप्य होने का।
कमियों का पिटारा है पास हमारे, फिर भी देखता हूँ सब ऐ चाँद तुझे छूने को।
मन मसोस के रह जाता हूँ, देखता हूँ जब मन के अंधियारे – दुरूह गलियों को।
पता नहीं था दिल को, तेरे पास रहके भी तुझसे दूर रहना पड़ेगा इस जीवन में।
कोई दुश्मन भी ना देता है, ऐसी सजा, वो सजा हम दे रहे है अपने आपको।
अंदाज न था हमको अपने इतना गये बीता होने का, शरम आने लगी है कहने से कुछ तुझसे।
सच्चाइयों से दूर – दूर तक का कोई वास्ता ना है मेरा, झूठ – मूठ ही सही प्यार करता हूँ तुझसे।
मत जाने देना अपने हाथ से, बड़ी मुश्किल से पाया है प्रियतम् – साथ तेरा।


- डॉ.संतोष सिंह