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My Divine Blessing
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Hymn No. 1503 | Date: 07-Jan-2000
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बहुत कुछ ऐसा है तेरी दुनिया में जो अब तक देखा समझा नहीं।
बहुत कुछ ऐसा है तेरी दुनिया में जो अब तक देखा समझा नहीं।
जाना ना है समझने की और बसाना है दिल में तूझें अपना।
वो तो रमे रहना चाहे, प्यार में तेरे, हर पल भूले हुये अपने आपको।
मिटा देना चाहता हूँ मन की हर ख्वाहिश को तेरी ख्वाहिश के सिवाय।
भविष्य में क्या होगा जो वर्तमान में तेरा ना हुआ, गम ना है भूत की।
अभूत है तेरी कार्य प्रणाली, जीते जी ना जो समझा मौत के बाद पछताया।
परे तू है रहके दिल में सबके, भटकते हम जहाँ में खोजतें तुझे।
अच्छा बुरा ना है कुछ दुनिया में तेरे, सच पूछों तो ना है कुछ जहाँ में सिवाय तेरे।
हालत में हो गयी है हर बात काम में ढूँढता हूँ अब हाथ तेरा।
नाथ कुछ अनुचित है तो बनाकें उचित अपना लेनां, बड़े मुश्किल से आया हूँ पास तेरे।
- डॉ.संतोष सिंह
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