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Hymn No. 1501 | Date: 06-Jan-2000
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मजबूर है मेरा दिल, याद किये बगैर रह नहीं पाता।
मजबूर है मेरा दिल, याद किये बगैर रह नहीं पाता।
होगा रहबर तू जहाँ का, बन गया है तू मेरा दिलबर।
नादानियों से भरा है दिल, तुझे ले लेके लगाये कयास कई।
हर आशय मिटाके मन का करता है प्यार दिल तुझसे ।
मत खेल आँख – मिचौली तू मुझसे तड़पता देख तू रो देगा।
करीब ना बुलाये तो क्या, मजबूर है तू रहने को पास मेरे।
सजाया तन को तो ना क्या, सजाया दिल को गुजारे गये संग तेरे लम्हों से।
एक तू ही ना है संसार को प्यार करने वाला, करते है हम भी प्यार बहुत।
राह के हर कण को रंगूगा लहू से जो जाता है दर की और तेरे।
झुकाने न आया हूँ झुकाऊँगा सर, प्यार से तुझमे समा जाने के वास्ते।


- डॉ.संतोष सिंह