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Hymn No. 1500 | Date: 06-Jan-2000
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मैं कुछ नहीं चाहता, चाहता हूँ कुछ तो तेरी खातिर।
मैं कुछ नहीं चाहता, चाहता हूँ कुछ तो तेरी खातिर।
मेरा होना है झूठ, तेरा होना शाश्वत सत्य माना गया।
आड़े आये मेरा धर्म तो तू तोड़ना धर्म की दीवार को।
कोई कुछ क्यों ना हो मिटा है सदा, सचमुच एक तू ही रहा।
हम हो या ना हो, तेरा होना सदा से तय ही रहा।
मेरे कहने से क्या, हर इक् ने सुनी है ये बात सदा।
तूने बनाया हर इक् नियम को तो उसको तोड़के भी दिखाया।
जोड़ना तुझसे बेहतर कोई न जाने, तू है माहिर इस कला में।
दाल गलती नहीं तेरे आगे किसीकी, पीछे की क्या है बात।
तू रहता है सदा साथ, पर जब तक न चाहे तू आता नहीं हाथ।


- डॉ.संतोष सिंह