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Hymn No. 1508 | Date: 08-Jan-2000
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नृत्य करूँ मैं तेरे संग, खेलूं नित्य नया – नया।
नृत्य करूँ मैं तेरे संग, खेलूं नित्य नया – नया।
गाऊँ गीत तेरे प्रीत में डूबके, विरह वेदना बढ़ती जाये मन में मेरे।
समझाया बहुत दिल को, तेरे बिना माने ना इक् पल को।
सताये क्या नहीं मन को, तेरे बिना बहला न पाऊँ किसी और से।
दीवानगी का दावा नहीं करता मैं, सुकून दे नहीं पाता कोई और सिवाय तेरे।
अंत चाहता हूँ इस अंतहीन प्रेम वियोग का, जिसका अंत है हाथों में तेरे।
दाँतों तले दबा लेता हूं उँगलियाँ, जब देखता हूँ अपनी करतूतों को।
कारण तो खुद ही हूँ, फिर भी नाम तेरा दिये बिना रहता नहीं।
पर यें भी सच है, हमने प्यार किया है सिर्फ तुझी से।
मन चाहे जो भी करे, दिल खोया रहता है ख्यालों में तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह