Hymn No. 1509 | Date: 09-Jan-2000
अटकते, भटकते, लटकते, मटकते पहुँचेगे पास तेरे दीदार करने वास्ते।
अटकते, भटकते, लटकते, मटकते पहुँचेगे पास तेरे दीदार करने वास्ते।
फुर्र हो जायेगी तेरी सारी नाराजगी, देखके प्यार हमारा।
झोल – झाल, बोल-बाल, गोल-माल, तेरा प्यार पाने कें वास्ते करेंगे हर करम हम,
कितना भी तू दिखायेंगा आँख, चूप हो जायेगा देखके हमारी बेकरारी।
नाचेंगे, गायेंगे, तरह – तरह के तरीपे अपनायेंगे, तेरी सजदा करने के वास्ते,
हर उस राह को करेंगे स्वीकार, जो ले जाये प्रियतम् की ओर।
हल्ला, गुल्ला, ढोल – ताशे बजायेगे बड़ी जोर से, प्रेम गीत तुझको सुनाने के वास्ते।
चाहके भी तू अनसुना ना कर सके, इजहार करेंगे प्यार का इतने जोर से।
दुर्र दुराना, फटकारना, मन में आने पे तू चपल लगाना, हो सके तो तू इससे भी ज्यादा कड़क पेश आना।
गेसूँ बहायेंगा दिल क्या हो गया ऐसा, जो होना पड़ा मजबूर तुझे करने से ऐसा।
हौले – हौले, चुपचाप, निस्तब्धता ओढके झाकेंगे तेरे तन मन दिल में कहाँ पहुचायी है चोट,
दोनों हाथ जोड़के, तुझे मालूम ना हो, करेंगे गुजारिश प्रभु सिध्द कर दे शिरच्छेद हमारा।
- डॉ.संतोष सिंह
|