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Hymn No. 1522 | Date: 20-Jan-2000
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एक ही बात याद आये हमको, तेरे संग बिताये गये प्यार के अनुपम पल।
एक ही बात याद आये हमको, तेरे संग बिताये गये प्यार के अनुपम पल।
मन की डोर खींच गयीं और तेरी, भूला मैं खुद को प्यार में तेरे।
सोच मेरी सारी खत्म हो उठी, भर उठा मस्ती के जोश से मैं।
अंग-अंग मेरा खिल उठा, जब पाया खुद को अपने करीब इतना।
मन का कोना – कोना पुलकित हो उठा, प्यार से भरी आँखों में जो डूबा।
हर्ष का ज्वार भीतर से उठा, यें कनीज बैठे – बैठे चरणों में तेरे रो पड़ा।
गत मेरी बदल गयी पास आके तेरे, अब तक लटका था अधर में।
कहना है मुश्किल होने को तो वही हूँ, फिर भी सब कुछ बदल गया।
सारे तीर्थों का दर्शन बैठे – बैठे करने लगा, पिता तेरे चरणों में।
ज्यो – ज्यो प्यार में घुलता गया, खत्म हो गयी हमारे बीच की सारी दूरियाँ।


- डॉ.संतोष सिंह