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Hymn No. 1531 | Date: 24-Jan-2000
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खो जाने दे, खो जाने दे, मुझको तेरे गीतों में खो जाने दे।
खो जाने दे, खो जाने दे, मुझको तेरे गीतों में खो जाने दे।
तड़पता था न जाने कब से तेरा सुमधुर गीत सुनने के वास्ते।
अंजान जीवन पथ पे बार – बार भटकाया कर्मों के जंजाल ने ।
तरसता था सावन – भादों में तेरे प्रेम रस में भीगने के वास्ते।
मन पे हावी रहती थी क्रूर इच्छायें, कई बार उढ़ाया जिन्होंने चिथड़ा मेरा।
आज वही व्याकुल हो उड़ा है तेरा प्रीत भरी राग सुनने के वास्ते।
वासनाओं के आग में जला करता थाकभी, आज जलता हूँ शक प्रेम में।
पूरी कर दे दिल की मेरी मनोकामना, भाप बनके उड़ जाने दे मेरे तन को।
चिंताकरने वाला आज डूबा है चितन में, क्या कर दूँ ऐसा हो जाये तू खुश।
दोष कितना भी रहा होगा मेरा, मदहोश हो जाने दे प्यार में तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह