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Hymn No. 1530 | Date: 24-Jan-2000
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जलके खाक हो जाऊँ तो भी कोई बात नहीं।
जलके खाक हो जाऊँ तो भी कोई बात नहीं।
मन में हो साथ तेरा तो मरने – जीने का कोई मतलब नहीं।
जीते जी बिछुड़ा जो तुझसे तो है वो मौत के समान।
मरने पे भी रहा जो साथ तेरा, तो जीवन का कोई मतलब नहीं।
सबके अर्थ है एक, कर लें तू कितना भी कुछ ना रहेगा निशेंष।
शेषमय होना पड़ेगा प्रभु दिल में प्रवेश करने के लिये।
बनके मिटने का खेल चलता रहेगा जब तक ना होगा तू उसका।
उसका चस्का इक् बार जो लगा, छूड़ाये ना छूटेगा कभी।
संसार में जो कुछ भी होता रहेगा, तू ना रूठेगा किसी से।
मतलब होके मतलब किसी से ना रहेगा, जो प्रभु में तू खोया रहेगा।


- डॉ.संतोष सिंह