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Hymn No. 1529 | Date: 23-Jan-2000
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मचलते हुये दिल से प्यार छलक जाता हें सरेआम।
मचलते हुये दिल से प्यार छलक जाता हें सरेआम।
दोष कोई क्या देगा हमको पिलाये निगाहों से जो तू जाम।
मिट जाये चाहे तेरा नाम, तेरे काम आ जाने दे कुछ।
दाग दामन पे है बहुत, बेदाग है दिल मेरा इंतजार में तेरे।
कसमें ना देता हूँ तुझे, ना ही बाँधुगा प्यार की जंजीर से।
रजा है दिल की, इक् तरफा ही सही प्यार कर लेने दे दिल को।
गिला – शिकवा ना है कोई, मन चाहता है रूठने मनाने को।
खेल चाहता हूँ ठहराता तूझें, यें तो सरूर है प्यार का।
जो आगे – पीछे ना देखे तुझे पाके हो जाता है तन्मय तुझमें।


- डॉ.संतोष सिंह