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Hymn No. 1533 | Date: 24-Jan-2000
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क्या - क्या स्वाँग रचाये, दिल के साथ हर बार कोई नया रास रचाये।
क्या - क्या स्वाँग रचाये, दिल के साथ हर बार कोई नया रास रचाये।
तर जाते है हम तेरा साथ पाके, पूरी हो जाती है दिल की आस।
हमने भी ना सोचा था कभी, ख्वाबों के बदले होगी साक्षात मुलाकात तुझसे।
हो गया साकार न जाने कितनें जनमों के अरमांन, जो मिल गया साथ तेरा।
खरा उतरना है हमको बताये हुये तेरे कार्यों को करके पूरा।
तू देते रहना आशीर्वाद यत्नों के सहारे, बनके दिखायेगे तेरा।
कमियों का रोना ना है रोना, तेरे सपनो को पूरा करके है दीखाना।
कल थे मंजिल से दूर तो क्या थे, आज चूमेंगे मंजिल के दर को।
आने – जाने के चक्कर को करना होगा खत्म प्रेम के अचूक वार से।
आये है तेरा बनने के वास्ते, तेरी कृपा से तेरा बनके दिखायेंगे।


- डॉ.संतोष सिंह