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Hymn No. 1534 | Date: 25-Jan-2000
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आया हूँ तेरे गाँव करने वास्ते तेरा दीदार।
आया हूँ तेरे गाँव करने वास्ते तेरा दीदार।
तड़पता था न जाने कब से मिला मौका आज।
इतने से चैन न आयेगा बसना होगा दिल में तुझे।
उलझे हुये है हम अपने उलझनों से भरे जीवन में।
तेरे पास होते सुलझ जायेंगी जीवन की सारी कमी।
नम आँखों के भीतर संजोया हूँ तसवीर तेरी प्यार से।
मार खाया कर्मों का कई बार फिर भी ना छोड़ा साथ।
होगी लाख कमियाँ हममें, फिर भी पुकारे दिल तूझें।
जीवन में होना होगा जो भी देखे होगे तेरी कृपा से।
तेरा साथ जो होगा पूरी कर लेगे अधूरी यात्रा आज।


- डॉ.संतोष सिंह